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स्वच्छ नदी सूनापन पसीना गन्दा बेबाक चने आवाज हिंदी कविता पारस कंचन मित्र रजोधर्म पेट नहीं समाज नीयत साफ शरण लोहे

Hindi गन्दा लोहे Poems